अनुक्रमणिका
1-गीता -4
2-‘‘तत्वदर्षन के विशय में स्वामी विवेकानन्द की वाणी’’ -4
3-‘‘हिन्दू’’ -5
4-‘‘यहूदी’’ -6
5-ब्रह्मांड और ईष्वर के विशय में वैज्ञानिक विचार धारा -7
6-क्वांटन काँस्मोलाॅजी -8
7-जीव विज्ञान के विचारक -8
8-एंथ्रांपिक सिद्धान्त -9
9-ईष्वर के वैज्ञानिक भक्त -9
10-सच्चा आध्यात्म -10
11-ऐष्वर्य -10
12-ओषो -11
13-ऊर्जा संतुलित का आहार -11
14-मथुरा वृदावन -12
15-यादों की एक्सरसाइज ऊँ -13
16-और तरीके -13
17-सगुण-निर्गुण चरम पर जब -14
18-आयार्च भगवान रजनीश के वचन-‘‘यात्रा अमृत की, अक्षय, निःसंशयता, निर्वाण और केवल ज्ञान की’’ -14
19-पावन दीक्षा प्रभु से जुड़ जाने की -16
20-षान्ति पाठ का द्वार विराट सत्य और प्रभु का आसरा -17
21-इस पाठ का सारांश -20
22-निर्वाण उपनिशद-अव्याख्य की व्याख्या -21
23-जो जाग्रत हैं, आत्मरत हैं आनन्दमय हैं, परमात्य आश्रित है -22
24-अनन्त धैर्य, अचुनाव जीवन और परात्पर की अभीप्सा -25
25-ब्रह्म दर्षन -25
26-परात्पर की अभीप्सा -26
27-परापवाद मुक्तो जीवन मुक्ति -26
28-अखण्ड जागरण से प्राप्त परमानन्दी तुरीयावस्था -27
29-स्वप्न-सर्जक मन का विसर्जन और नित्य सत्य की उपलब्धि -30
30-साधक के लिए षून्यता, सत्य, योग, अजपा, गायत्री
और विकार-मुक्ति का महत्व -31
31-आनन्द और आलोक की अभीप्सा उन्यनी गति और परमात्म आलम्बन -39
32-अन्तर आकाश में उड़ान स्वतन्त्रता का दायित्व
और शक्तियाँ प्रभु-मिलन की ओर -42
33-अद्वैत सदानन्द ही देव है -45
34-सम्यक त्याग, निर्मल शक्ति और परम अनुषासन मुक्ति में प्रवेश -46
35-बाहरी अनुषासन से हानि भी है -48
36-इससे कैसे मुक्त हों -49
37-असारबोध, अहं विसर्जन और तुरीय तक यात्रा और साक्षीत्व से -50
38-चैतन्यमय होकर संसार त्याग -51
39-त्याग -52
40-भ्रांति-भजन, कामादिवृत्ति दहन, अनाहत मंत्र और अक्रिया में प्रतिष्ठा -53
41-कामादिवृत्ति दहनम् -56
42-अनाहत मंत्र -59
43-निर्वाण रहस्य अर्थात सम्यक सन्यास, ब्रह्म जैसी चर्या और सर्व देहनाश -61
44-निर्वाण की यात्रा प्रारम्भ-‘‘ईषावास्योउपनिशद’’ ‘‘वह पूर्ण है’’ -63
45-‘‘वह परम भोग है’’ ‘‘हरिःऊँ’’ -68
46-वह निमित्त है -71
47-वह अतिक्रमण है -75
48-वह समत्व है -83
49-वह स्वयंभू है -87
50-वह अव्याख्य है -91
51-वह चैतन्य है -94
52-वह ब्रह्म है -101
53-वह ज्योतिर्मय है -107
54-वह षून्य है -114
55-ओ3म् षान्तिः षान्तिः षान्तिः -121
56-असतो मा सद्गमय -124
57-शरीर और आत्मा के कर्म एवं फल का विष्लेशण -130
58-राम कथा समाज का भय हरने वाली अमृतवाणी-
द्वारा मोरारी बापू-चुनार में -131
59-माया अजेय है -132
60-कामाख्या देवी मन्दिर -134
61-बिना ब्रह्म दर्षन के तृप्ति नहीं (कहानी ष्वेत केतु की) -135
62-विचारों में स्थिरता के लिए -136
63-अजमेर-शरीफ अजमेर वही जाते हैं जिन्हें ख्वाजा बुलाते हैं -137
64-अनहद-सुख-दुख और पीड़ा -139
65-बाइबिल -140
66-आत्म बल-आत्म संयम से सर्वोत्तम बल बन जाता है -141
67-अमृतवाणी -141
68-सुख और आनन्द -142
69-‘‘अधिक मास’’ -143
70-श्री विष्णु हरि साधना -143
71-लक्ष्मी का बीज मंत्र -144
72-षिव तत्व आवष्यक है -145
73-भौतिक युग और षिव -146
74-श्रावण मास -147
75-ऊँ नमः षिवाय महा मृत्युंजय साधना -148
76-पाषुपतास्त्रेय साधना -149
77-रसेष्वर साधना -149
78-महाकाल प्रयोग -151
89-षिष्य धर्म -152
80-गुरूवाणी -153
81-आप पूजा क्यों करते हैं -154
82-षिव की शक्ति है महागौरी -157
83-गौरी स्वरूप महालक्ष्मी साधना -157
84-हर गौरी महालक्ष्मी साधना -158
85-साधना विधान -158
86-प्रेम ही ईष्वर है-ज़िन्दगी घड़कन है तेरी -159
87-षिव गौरी -163
88-सरस्वती स्तुति -167
89-यह माया है -168
90-ओ मधुरतम् कृष्ण -169
91-पूर्ण पुरुश कृष्ण-दुर्गा भागवत -169
92-भारतवर्ष की आत्मा है -170
93-प्रवचन-जीवन परमात्मा का प्रसाद है -171
94-जनेऊ का महत्व -172
95-अवतार का महत्व -173
96-गायत्री रामायण -174
97-सद्गुरू ज्योति को मिलाता है -176
98-सत्यस्य सत्यम् -177
99-विज्ञान और धर्म -178
100-प्रेम और प्यार में अन्तर -180
101-राधा बिन कृष्ण अधूरे -181
102-परमानन्द की खोज -182
103-परहेज और सब्र का महीना -183
104-दीपावली में लक्ष्मी -185
105-भगवान बुद्ध -185
106-प्रणाम का महत्व -185
107-’‘बोध कथा’’ -187
108-‘‘श्राद्ध के विशय में’’ -187
109-आठ सिद्धियाँ -189
110-‘‘अनहद’’-राम का तात्पर्य -190
111-अर्जुन को अपनी स्थिति का वर्णन द्वारा कृष्ण ‘‘गीता अध्याय 10’’ -191
112-यात्रा टिप्पणी अल्मोड़ा से बिंसर की -192
113-द्वारा मुरारी बापू -194
114-संगीत -194
115-सौन्दर्य के गुण -198
116-स्पष्ट आध्यात्म-स्वयं से-षंकर -198
117-प्राचीन कालीनषिष्योंकीभक्ति काआदर्ष -198
118-द्वारा श्री बल्लभा जी महाराज -199
119-उपासना की विधियाँ -200
120-सभा -202
121-षामे अवध -233
122-लखनऊ के इमामबाड़े -236
123-लखनऊ के प्राचीन प्रसिद्ध मंदिर -238
124-अवध की कवित्रियों का सौंदर्य वर्णन -239
125-बैकुण्ठ चतुर्दषी व्रत की कथा -250
126-षाकाहार भोजन का तिरंगा झंडा से समानता -251
127-नवें गुरू तेगबहादुर सिंह -251
128-बारह देवियों का पूजन किस माह में करें -251
129-कुण्डलिनी -252
130-चैतन्य होने के लिए -253
131-डल् प्छक्प्। -253
132-श्री गणेषाय नमः -254
133-आदर्ष वाक्य -254
134-महाभारत से -260
135-परमपूज्य गुरू आसाराम जी महाराज-द्वारा अमृत वचन -261
136-षुभ संदेश -262
137-स्वअम. -262
138-जीवन का सद्उपयोग -262
139-स्वतन्त्रता-दिवस (15 अगस्त 1947 ई0 पर) -263
140-ज्योतिषि -264
141-देश को एकता के सूत्र में बाँधती हैं 51 शक्ति पीठें -265
142-शक्ति-साधना-डा0 जीवन षुक्ल -269
143-भक्ति का धर्म-द्वारा षंकर संकलनकर्ता एवं रचयिता -270
144-सदा दिवाली-गुरूवर संत श्री आषारामजी महाराज -275
145-तपती रही सलाख में से-द्वारा कविवर श्री कोमल षास्त्री -281
146-वन फूल-द्वारा पं0 रूप नारायण त्रिपाठी मुक्तक (माटी की मुस्कान से) -290
147-कानन कुसुम-द्वारा जयषंकर प्रसाद -303
148-खण्डित पूजा-द्वारा मधुरिमा सिंह -310
149-’’वीर प्रकरण’’-द्वारा कविवर वीर सेन सिंह -320
150-राधा के सगुण-ऊधो के निर्गुण-द्वारा विन्दु जी -328
151-अन्य -330
152-सबरसरंग से -336
153-गीत की खेती से -388
154-खण्ड काव्य-नमन् इन्दिरा से -408
155-माया प्रबल है -416
156-बेहद खास है आज का दिन, 100 साल बाद मिलेंगे 9,9 और 9 -416
मंगलवार, 6 अप्रैल 2010
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